कुछ वक़्त
कि कुछ इस तरह तुम्हारे वक़्त का इंतजार किया है, के अब इंतज़ार भी इंतजार करने लगा है. .. कोशिस तो बहूत किया तुम्हारे वक़्त मे खुद को समा पाऊ, लेकिन काश तुम समझ पाते कि वक़्त रहने मे और वक़्त देने मे कितना फर्क़ है. की ये एहसास भी कितना खूबसूरत होता हैं जब आप किसी के वक़्त के लिए तड़पे और उसे इस बात की भनक भी ना लगे.. और तुम पास होकर भी कितने दूर हो गए, और तेरी ये एहसास को हम प्यार समझ बैठे.. की वो वक़्त की कदर तुम जरूर करते. पर वो एहसास से तुम आजाद जो हो चुके थे.. की कुछ इस तरह तुम्हारे वक़्त का इंतजार किया है, के अब इंतज़ार भी इंतजार करने लगा है. ..