Posts

कुछ वक़्त

कि कुछ इस  तरह तुम्हारे वक़्त का इंतजार किया है, के अब इंतज़ार भी इंतजार करने लगा है. ..  कोशिस  तो बहूत किया तुम्हारे वक़्त मे खुद को  समा पाऊ, लेकिन काश तुम समझ पाते कि वक़्त  रहने मे और वक़्त  देने मे कितना फर्क़ है.  की ये एहसास भी कितना खूबसूरत होता हैं जब आप किसी के वक़्त के लिए तड़पे और उसे इस बात की भनक भी ना लगे..  और तुम पास होकर भी कितने दूर हो गए, और तेरी ये एहसास को हम प्यार समझ बैठे..  की वो वक़्त की कदर तुम जरूर करते. पर वो एहसास से तुम आजाद जो हो चुके थे..  की कुछ इस  तरह तुम्हारे वक़्त का इंतजार किया है, के अब इंतज़ार भी इंतजार करने लगा है. .. 

Vo darvaza

दरवाज़ों का सिरहाना पकड़ कर बैठ जाती हूं मैं अक्सर। सोचती हूं इसने कितने ही लोगों को आते जाते देखा होगा। कितने ही रिश्तों के जुड़ने और टूटने का गवाह रहा होगा ये। कितनी ही बार दो लोगों ने इसके दोनों तरफ़ बैठ कर आंसू बहाए होंगे नाराज़गी और बिछुड़न के गम में। कितनी ही बार किसी की ज़िन्दगी और मौत के बीच का फासला रहा होगा ये दरवाज़ा। . और न जाने कितनी बार अपने हृदय को कचोटते हुए इसने मांगा होगा कि काश मैं होता ही नहीं। . . और अगर इस सबके बाद थोड़ा वक़्त बच जाए तो मैं उस शख्स के खयालों में खो जाती हूं जो मेरे दर पर कभी आया ही नहीं।